हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा की खट्टर सरकार की पंचायती चुनाव अधिनियम में संसोधन की मांग वाली याचिका के पक्ष में सुनवाई करते हुए चुनाव नियमो में फेरबदल करने की अनुमति दे दी हे जिसके तहत अब हरियाणा में पंचयात चुनाव लड़ने के लिये शैक्षणिक योग्यता निर्धारित की जा सकेगी। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला सच में स्वागत योग्य भी हे क्योंकि जब देश में एक निचले दर्जे की नोकरी के लिये भी शैक्षणिक योग्यता निर्धारित हे तो नेता बनने के लिये क्यों नही? आई.आई.टी. , आई.पी.एस.सी. , यू.पी.एस.सी. जैसी कई कठिन परीक्षाओ को पास कर और आरक्षण के मकड़ जाल से दो चार होते हुए छात्र किसी पद पर पहुँच पाते हे लेकिन जनाब जरा उसी देश की विडम्बना तो देखिये आज़ादी के साठ साल बाद भी देश के बड़े बड़े राजनेतिक पदों पर पहुचने के लिये कोई भी शैक्षणिक योग्यता तय नही की गयी हे। राजनीत में आने और नेता बनने के लिये आपको किसी भी प्रकार की डिग्री की कोई अवस्यक्ता नही हे, पर हां बाशर्ते आपके पास धनबल और बाहुबल होना चाहिये तभी तो देश में पांचवी फ़ैल विधायक सांसद बन जाते हे,नोवि फ़ैल डिप्टी सी.एम. और अगर आप बारव्ही में फ़ैल भी हे तो भी आप 125 करोड़ से ज़्यादा आबादी वाले देश के मानव संसाधन विकास मंत्री तो बन ही सकते हे। अब आप इसे लोकतंत्र कहे या राजनीत लेकिन शैक्षणिक योग्यता तय ना होने के कारण कई काबिल लोग इन अनपढ़ नेताओ से पीछे रह जाते हे और आयोग्य हाथो में देश भी सही विकास नही कर सकता। राजनीती से सरकार बनती हे और सरकार देश चलाती हे इसलिये ज़रूरी हे की चुनाव लड़ने के लिये प्रत्याशियो का शैक्षणिक स्तर निर्धारित किया जाये ताकि योग्य व्यक्ति सरकार का हिस्सा बन सके।
वासु चौरे
एम.सी.यू
भोपाल
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