कभी धूप हे,कभी छाँव हे
मुझे संघर्ष से प्यार हे
कभी अविरल धार हे
कहीं पत्थरों से टकराव हे
पड़ाव पड़ाव राह में दरार हे
मुझे हर चुनोति स्वीकार हे
मुझे संघर्ष से प्यार हे...
दरिया में उतरा हूँ सामने सैलाब हे
फ़िक्र नही डूबने की मुझे खुद पर विश्वास हे
जंग लग गई हथियारों में
मेरी कलम में धार हे
मुझे संघर्ष से प्यार हे...
गली गली मचा शोर हे हार का
मुझे जीत का इन्तजार हे
सुखी पड़ी हे धरा वीरों की
यहां बारिश की दरकरार हे
मुझे संघर्ष से प्यार हे...
ख़्वाब टुटा था रात के अंधेरो में कहीं
ये आँख अब तक लाल हे
लालिमा छाई हे नयी नयी
पूरी सुबह होने का इंतज़ार हे
मुझे संघर्ष से प्यार हे...
मंज़िल दूर हे आँखों से
मुझे रास्तो पर ऐतबार हे
रुकुंगा नही छितिज तक में
मेरी ज़िद ही चुनोतियों की हार हे
मुझे संघर्ष से प्यार हे...
मुझे संघर्ष से प्यार हे...
#VCवासु
बहुत ही संघर्षमय काव्य :)
ReplyDeleteधन्यवाद सौरभ भाई
DeleteWonderful
DeleteThank you mam :)
Deleteबहुत ही शानदार भाई
ReplyDeleteThanks Bhaiya
DeleteBht shandar
ReplyDeleteThanks Soumya :)
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