Thursday, 27 April 2017

किताबों की ज़रूरत है...

ज़िन्दगी की परिभाषा हर किसी के लिए अलग हो सकती है किसी के लिये शायद कुछ सरल हो तो किसी के लिये कठिन,सबके लिये समान हो ये मुश्किल है पर सबके लिये बेहतर तो बनाई जा सकती है।हम सब जानते है।हमारे देश में एक बड़ा तबका आज भी गरीबी रेखा के नीचे अपना जीवन गुजर-बसर करने वालो का है।गरीबी के कई कारण हो सकते है  पर आज विश्विद्यालय के पास दो तीन गरीब बच्चों से हुई बातचीत ने देश के इस अभिषाप के मूल कारण के बारे में सोचने के लिये प्रेरित किया,दरअसल ये बच्चे एक चबूतरे पर थोड़ी सी इमली और कुछ कैरीयां
लिये उन्हें बेचने बेठे थे,उम्र होगी 5 से 8 साल जो सामान बेच रहे थे उसकी कीमत का भी उन्हें अंदाज़ा ना था फिर भी मैने पूछा जो पैसे मिलेंगे इनसे उनका क्या करोगे उत्तर मिला की खाना पकायेंगे।स्कूल के बारे में पूछा तो बताया की हां, जाते हे और किताबो की बात की तो बच्चों ने कहा की 1,2,3 और बाराखड़ी की किताबे चाहिये हे,तब मुझे लगा की अगर इन्हें ये किताबे मिल जाये तो शायद इनका भविष्य इनके वर्तमान की तरह अन्धकारमय नही होगा।
इस सब के बीच  एक बात समझ आई की देश में गरीबी का मुख्य कारण अशिक्षा ही है।
विगत सरकरों से लेकर अबतक की सरकारों ने गरीबी को हटाने के लिये अपने स्तर पर काफी प्रयास किये,योजनाये बनाई परंतु जानकारी के अभाव और अशिक्षा के चलते एक बड़ा तबका इन व्यवस्थाओ का लाभ लेने से वंचित रह गया,अशिक्षा की समस्या सिर्फ गरीबी तक  सीमित नही है,इसके और भी दुष्परिणाम हमारे सामने हे जिनमे मुख्य हे बढ़ती अपराधिक मानसिकता शिक्षा और वैभव के अभाव में व्यक्ति कई बार ना चाहते हुए भी अपराधो की दुनिया में प्रवेश कर लेता है।
हमारे लिये बड़ी विडम्बना यह भी है की जहां एक और हम मंगल तक पहुंच गये हें,विज्ञान से लेकर खेल की दुनिया तक हमने कई कीर्तिमान स्थापित किये परंतु वही दूसरी तरफ हमारे ही  देश में कुछ मासूम हाथो तक अबतक किताबे नही पहुँच पायी है।
शिक्षा ही एक माध्यम है जिससे हम गरीबी को मिटा सकते हें,देश की एक और पीढ़ी गरीब बड़ी हो उससे पहले  ज़रूरत हे सार्थक प्रयासों की जिससे हम अपने देश के भविष्य को अशिक्षा के  अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर लेकर जाये ताकि भारत के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नीव तैयार हो सके,इसकी ज़िम्मेदारी सिर्फ सरकार की नही हम सबकी है।

वासु चौरे