Thursday, 11 February 2016

सीख पिता की...(कविता)

ये कहकर घर से भेजा पापा ने
घर से जा रहे हो बेटा दूर
उम्मीदें हे लाखो तुमसे
हो सबकी आँखों का नूर तुम

ख्वाब बड़े हे,दिखते तुम्हारी आँखों में
होने ना देना इन्हें चूर तुम
मंज़िल हे तुम्हारी हे,सफर तुम्हारा बेटा...

चलते चलते थक जाओ राह में
तो कर लेना थोड़ा आराम तुम
उठकर फिर से चलने लगना
रास्ते में ही न रुक जाना तुम..

छलांग लगाने की कोशिश में
गिरोगे दस बार बेटा..
धीरे धीरे कदम बढ़ाना
कोई छोटा रास्ता ना अपनाना तुम..

ये दुनिया हे,होता कुछ भी ना असां यहां
पर जारी रखना प्रयास तुम
नामुमकिन भी हे होता मुमकिन
खुद पर रखना यकीन तुम...

श्री कृष्ण तुम्ही हो
और अर्जुन भी तुम तुम्हारे ...
हो सवार सफलता के रथ पर
दूर शिखर तक जाना तुम..

बाते करते हो बड़ी बड़ी
कुछ करके भी दिखाना तुम...

#VCवासु