Sunday, 11 December 2016

मील के पत्थर से ज़्यादा कुछ नही मंज़िले,रास्ते आवाज़ देते हे सफर जारी रखो

12062 जबलपुर-हबीबगंज जनशताब्दी एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय से 15 मिनिट देरी से चल रही हे आपको हुई असुविधा के लिए हमे खेद हे... 3 दिन करेली में बिताकर कल रात को बैग जमाते हुए कुछ और यादे भी बेग में ठूस ली,रोहित भैया की शादी में नरसिंहपुर और गाडरवारा के साथियो से मुलाकत,लगभग 3 साल बाद संस्कारधानी में शॉपिंग साथ ही  जबलपुर की हैदराबादी बिरयानी।घर आओ तो शाम का इंतज़ार बेसब्री से रहता हे, और हो भी क्यों ना शाम का समय ही तो होता हे जब दो बेहद अज़ीज़ मित्रो से मुलाक़ात होती हे असफाक और  समीर,सालो से चली आ रही दोनों की आपसी नोकझोंक मे कब लाल सूरज ढल जाता हे और  चाँद अपनी चांदनी समेटे हुए निकाल आता हे पता ही नही चलता और इसी बीच आग में घी डालने के लिए हमारे अंचल भाई हो तो समझ लीजिये सोने पर प्लैटिनम।मलखान के चाय के टपरे पर ठंडी लोहे की बेंच पर बैठकर गरमा-गर्म चाय का मज़ा ही कुछ और होता हे चाय की हर चुस्की के साथ किसी ना किसी दोस्त की याद जुडी हुई होती हे जो मुस्कान बनकर चेहरे पर खिल उठती हे,चाय के बाद नेमा जी की मंगोड़ी,और सार्थक के घर गपशप ट्रेन में आँख बन्द करते ही याद आने लगती हे।
                                  यह सब बहुत सुखद अनुभवो की मीठी यादे हे जो ज़िन्दगी के सेविंग्स एकाउंट में फिक्स डिपाजिट होती जाती हे पर सच्चाई यही हे कही पहुँचने के लिए कही से निकलना पड़ता हे...एक बार फिर जन्म भूमि से कर्म भूमि की ओर,कुछ हासिल करने और  मन में इस भरोसे के साथ की जब अगली बार सब दोस्त मलखान पर  साथ बैठेंगे तो सबके पास अपनी नयी कामयाबियों के ढेरो किस्से होंगे सुनाने के लिये। राह के पत्थर से ज़्यादा कुछ नही मंज़िले,रास्ते आवाज़ देते हे सफर जारी रखो...

मिलते हे :)

Friday, 6 May 2016

मुझे संघर्ष से प्यार हे

कभी धूप हे,कभी छाँव हे
मुझे संघर्ष से प्यार हे

कभी अविरल धार हे
कहीं पत्थरों से टकराव हे

पड़ाव पड़ाव राह में दरार हे
मुझे हर चुनोति स्वीकार हे

मुझे संघर्ष से प्यार हे...

दरिया में उतरा हूँ सामने सैलाब हे
फ़िक्र नही डूबने की मुझे खुद पर विश्वास हे

जंग लग गई हथियारों में
मेरी कलम में धार हे

मुझे संघर्ष से प्यार हे...

गली गली मचा शोर हे हार का
मुझे जीत का इन्तजार हे

सुखी पड़ी हे धरा वीरों की
यहां बारिश की दरकरार हे

मुझे संघर्ष से प्यार हे...

ख़्वाब टुटा था रात के अंधेरो में कहीं
ये आँख अब तक लाल हे

लालिमा छाई हे नयी नयी
पूरी सुबह होने का इंतज़ार हे

मुझे संघर्ष से प्यार हे...

मंज़िल दूर हे आँखों से
मुझे रास्तो पर ऐतबार हे

रुकुंगा नही छितिज तक में
मेरी ज़िद ही चुनोतियों की हार हे

मुझे संघर्ष से प्यार हे...
मुझे संघर्ष से प्यार हे...

#VCवासु

Thursday, 11 February 2016

सीख पिता की...(कविता)

ये कहकर घर से भेजा पापा ने
घर से जा रहे हो बेटा दूर
उम्मीदें हे लाखो तुमसे
हो सबकी आँखों का नूर तुम

ख्वाब बड़े हे,दिखते तुम्हारी आँखों में
होने ना देना इन्हें चूर तुम
मंज़िल हे तुम्हारी हे,सफर तुम्हारा बेटा...

चलते चलते थक जाओ राह में
तो कर लेना थोड़ा आराम तुम
उठकर फिर से चलने लगना
रास्ते में ही न रुक जाना तुम..

छलांग लगाने की कोशिश में
गिरोगे दस बार बेटा..
धीरे धीरे कदम बढ़ाना
कोई छोटा रास्ता ना अपनाना तुम..

ये दुनिया हे,होता कुछ भी ना असां यहां
पर जारी रखना प्रयास तुम
नामुमकिन भी हे होता मुमकिन
खुद पर रखना यकीन तुम...

श्री कृष्ण तुम्ही हो
और अर्जुन भी तुम तुम्हारे ...
हो सवार सफलता के रथ पर
दूर शिखर तक जाना तुम..

बाते करते हो बड़ी बड़ी
कुछ करके भी दिखाना तुम...

#VCवासु